मंगलवार, 31 जनवरी 2012
तेरे शहर में
शुक्रवार, 27 जनवरी 2012
पुरी कहानी ।
बुधवार, 25 जनवरी 2012
पत्थर दिल
चोट मिलने पर हम कहते है,वो तो पत्थर दिल है
बुधवार, 28 दिसंबर 2011
सिर्फ वे ही नही है।
उनके बिना आज बिलकुल अकेला हू।
उनके बिना आज पहला है मेला,
मेले मे लेकिन मै बिलकुल अकेला हू।
बरगद की छांव अब सर पे नही है,
मेले मे चेहरे भी सारे वही है ,
सब कुछ सही है, सिर्फ वे ही नही है।
(28 दिस. की रात पापा की याद में। )
मंगलवार, 20 दिसंबर 2011
कोहराम ।
पत्थर के दरवाजे ।
घायल ही हुआ .
उसे क्या पता था
पत्थर के शहर मे अब दरवाजे भी पत्थर के बनने लगे ।
माना पुरा शहर हो गया पत्थर का
लेकिन ये जरुरी नही
कि हम भी पत्थर के हो जाये ।
शुक्रवार, 9 दिसंबर 2011
गिद्धो की जान खतरे में ।
शायद आपका जवाब हा मे हो .
लेकिन क्या आपको लगता है की आपके बच्चे ,जटायु के इस वंशजो को देख पाएगे .
देखिए मेरी इस खबर मे
गुरुवार, 8 दिसंबर 2011
कच्ची शराब का कहर।
मौत का बिस्तर
कच्ची उम्र मे प्रेम का रोग।
रविवार, 27 नवंबर 2011
अब मै चोर बन गया ।
सोमवार, 4 जुलाई 2011
my wealth
सोमवार, 7 मार्च 2011
एक वादा ।
करो करो खुब वादे,खाओ खुब कसमे।
कल वे भी भुल जायेगे
किसी ने खुब कहा है
वाक्यम किम दरिद्रतम ।
मंगलवार, 22 फ़रवरी 2011
अकेलापन ।
अकेलापन
खुद से लडने का भरपुर मौका देता है।
जब दुनिया पीठ दिखाती है,
तो अकेले,
अकेलापन आलिंगन को बुलाता है
अकेलापन
हवा के विपरीत चलने का जज्बा देता है.।
अकेलापन
अपनो के लिये जी भरकर रोने का मौका देता है।
रहस्य ।
कमर के निचे ना जाने क्या रखे रहते है।
बात बात मे उनकी वो चीज सुलग जाती है।
अगर ये बात अमेरीका जान जाता,
उसका बारुद बनाने का खर्चा बच जाता ।
बुधवार, 16 फ़रवरी 2011
जब पाप मुझसे डरते थे। (भाग-2)

मालटारी मे मेरा आंतक बदस्तुर जारी था, हालत यहा तक आ पहुची कि अब तो लोग ने अपने बच्चो पर मुझसे बात करने या मेरे साथ खेलने पर अघोषित प्रतिबंध लगा दिया था। लोगो को यह डर सताने लगा था कि रोहित के कारण उनके बच्चे न बिगड जाये,जिसके कारण मै अब खुद को अकेला पाने लगा था, मै जब घर से बाहर निकलता तो लोग अपने बच्चो को घर मे वापस बुला लेते थे। मै सोचता था कि बच्चे मुझसे डर कर घर मे लौट जाते है, लेकिन ये हकीकत मुझे बाद मे पता चला कि मेरी तुलना कटहे कुत्ते से की जाती थी और जिस तरह लोग कटहे कुत्ते को देखकर रास्ता बदल देते थे कुछ इसी तरह क भुमिका मेरी थी ।
उधर लाड दुलार और लात से मेरा गालीयाँ छुडाने मे जब पापा हार गये तो उन्हाने मेरी गालीयो से अपने दोस्तो को बचाने का एक अजुबा हथियार खोज निकाला था ,पापा ने एक दिन बडे प्यार से पुचकारते हुये मुझसे कहा कि बेटा तुम आजकल कोइ बढिया गाली नही दे रहे हो,मेरी बडी बेइज्जती हो रही है। मै चिन्ता मे पड गया और पुछा पापा कोइ खुब बढिया और बडी गाली बताइये,पापा को मानो मुहमागी मुराद मिल गयी और वे इस मौके को हरगीज गवाना नही चाहते थे, उन्होने तुरंत मुझसे मेरे कान मे घिरे से कहा कि किसी को बताना मत, सबसे बडी गाली होती है,मै चुतिया हुँ,मै कमिना हुँ, मै कुत्ता हुँ । पापा से ज्ञान पाकर मेरे चेहरे पर गजब सी चमक आ गयी थी मानो जैसे महाभारत मे अर्जुन को कन्हैया का साथ मिल गया था। मै इस ब्रह्मास्त्र को अजमाने के लिये बेचैन हो उठा था ,कोइ शिकार न देखकर मैने पापा पर ही मै चुतिया हुँ,मै कमिना हुँ, का ब्रह्मास्त्र छोड दिया और पापा ने अनमने ही हाँ बहुत अच्छा कहकर इस ब्रह्मास्त्र के प्रक्षेपण को सफलता पुर्वक लक्ष्य पर मार करने का प्रमाण दे दीया।
अब क्या था , मै रोज सुबह शाम मालटारी मे ब्रह्मास्त्र दागने लगा । लोग मुछपर हसते और मै समझता कि अब लोगो को मेरी गालियाँ अच्छी लगने लगी है ।
शारदा चाचा का पापा से चिढना या बैर रखने का एक कारण ये भी था की पापा अक्सर अपनी कहानीयो मे (पापा ने 500 से अधिक कहानी अखबारो और पत्रिकाओ लिखी है ) उन्हे ही पात्र बनाया करते थे और उनकी सारी करस्तानी सार्वजनिक हो जाती थी । दरअसल शारदा चाच का चरित्र किसी अजुबे से कम न था ,कोइ भी साहित्य का अदमी उन पर रोज एक कहानी लिख सकता है.और यही गुस्ताखी पापा अक्सर करते थे,जिसके कारण वे मुझे बर्बाद करने पर तुले थे ।
(आज अब इतना ही, आगे बताउगा कि जब मैने उस आदमी को बडकी गाली दी जो बाद मे देश का प्रधानमंत्री बना और पापा की शारदा चाचा पर लिखी कुछ कहानी भी ,थोडा इंतजार करें ।)
इसे पढने से पुर्व जब पाप मुझसे डरते थे ।http://rohitbanarasi.blogspot.com/2010/09/blog-post.html जरुर पढे
रविवार, 16 जनवरी 2011
समय, धिरे चलो ।
मंगलवार, 11 जनवरी 2011
नये साल का गिफ्ट
शुक्रवार, 1 अक्टूबर 2010
सभंल जा उपर वाले ।
कभी राम बनकर लडाया तो कभी खुदा बनकर चिढाया,
क्या सोचा नही कभी तुने
गर एक हो गये हम (हिन्दु मुसलमान )
धरती पे कहाँ रहोगे तुम
मंगलवार, 28 सितंबर 2010
ऐसे ही मोक्ष देती रहो माँ




